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Atharvaveda / 2 / 17 / 3

बल॑मसि॒ बलं॑ दाः॒ स्वाहा॑ ॥ 3॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 2 | Sukta : 17 | Paryay : | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : प्राणः, अपानः, आयुः | छन्द : एदपदासुरीत्रिष्टुप् | स्वर :

विषय : आयु बढ़ाने के लिये उपदेश।

पदपाठ : बल॑म् । अ॒सि॒ । बल॑म् । मे॒ । दा॒: । स्वाहा॑ ॥१७.३॥

पदार्थ : [हे ईश्वर !] तू (बलम्) सामाजिक बल (असि) है, (मे) मुझे (बलम्) सामाजिक बल (दाः) दे, (स्वाहा) यह सुन्दर आशीर्वाद हो ॥३॥"

भावार्थ : परमेश्वर में सब देवता, मनुष्य आदि समाजों का बल है, ऐसा जानकर मनुष्य अपने कुटुम्बी आदि से प्रीति बढ़ाकर सामाजिक बल बढ़ावें ॥३॥

टिप्पणी :३–बलम्। बल जीवने, दाने, वधे–पचाद्यच्। बलते विपक्षान् हन्तीति। सामान्यशक्तिः। सैन्यम्। सामाजिकं सामर्थ्यम् ॥