Atharvaveda / 3 / 8 / 6
अ॒हं गृ॑भ्णामि॒ मन॑सा॒ मनां॑सि॒ मम॑ चि॒त्तमनु॑ चि॒त्तेभि॒रेत॑। मम॒ वशे॑षु॒ हृद॑यानि वः कृणोमि॒ मम॑ या॒तमनु॑वर्त्मान॒ एत॑ ॥6॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 3 | Sukta : 8 | Paryay : | Mantra No : 6
In English:
Seer : atharvaa | Devta : manaH | Metre : jagatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : aha.m gRRibhNaami manasaa manaa.msi mama chittamanu chittebhireta. mama vasheShu hRRidayaani vaH kRRiNomi mama yaatamanuvartmaana eta .6.
Component Words : aham . gRRibhNaami . manasaa . manaa.msi . mama . chittam . anu . chittebhiH . aa . ita. mama . vasheShu . hRRidayaani . vaH . kRRiNomi . mama . yaatam . anu.avartmaanaH . aa . ita .8.6.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मनः | छन्द : जगती | स्वर :
विषय : प्रीति उत्पन्न करने का उपदेश।
पदपाठ : अ॒हम् । गृ॒भ्णा॒मि॒ । मन॑सा । मनां॑सि । मम॑ । चि॒त्तम् । अनु॑ । चि॒त्तेभि॑: । आ । इ॒त॒। मम॑ । वशे॑षु । हृद॑यानि । व॒: । कृ॒णो॒मि॒ । मम॑ । या॒तम् । अनु॑ऽवर्त्मान: । आ । इ॒त॒ ॥८.६॥
पदार्थ : (अहम्) मैं (मनसा) अपने मन से (मनांसि) तुम्हारे मनों को (गृभ्णामि= गृह्णामि) थामता हूँ, (मम) मेरे (चित्तम् अनु) चित्त के पीछे-पीछे (चित्तेभिः=चित्तैः) अपने चित्तों से (आ इत) आओ। (मम वशेषु) अपने वश में (वः हृदयानि) तुम्हारे हृदयों को (कृणोमि) मैं करता हूँ, (मम यातम्) मेरी चाल पर (अनुवर्त्मानः) मार्ग चलते हुए (आ इत) यहाँ आओ ॥६॥"
भावार्थ : प्रधान पुरुष अपने शुभ विचार और साहस से सब सभासदों और प्रजागणों को धर्म पथ पर चलाकर परस्पर मेल के साथ साहसी और उत्साही बनावे ॥६॥
टिप्पणी :६−(अहम्)। प्रधानपुरुषः। (गृभ्णामि)। भस्य हः। गृह्णामि। स्थिरीकरोमि। (मनसा)। मानसिकबलेन। (मनांसि)। मानसिकबलानि। (चित्तम्)। ज्ञानम्। (अनु)। अनुसृत्य। (चित्तेभिः)। चित्तैः। ज्ञानैः। (आ इत)। आगच्छत। (मम)। स्वकीयेषु। (वशेषु)। वश कान्तौ-अप्। आयत्तत्वेषु। प्रभुत्वेषु। (हृदयानि)। अन्तःकरणानि। (वः)। युष्माकम्। (कृणोमि)। करोमि। (यातम्)। या गतौ-क्त। गमनम्। (अनुवर्त्मानः)। अनु+वर्त्मन्। अनुसृतमार्गाः सन्तः ॥