Atharvaveda / 3 / 31 / 9
प्रा॒णेन॑ प्राण॒तां प्राणे॒हैव भ॑व॒ मा मृ॑थाः। व्य१॒॑हं सर्वे॑ण पा॒प्मना॒ वि यक्ष्मे॑ण॒ समायु॑षा ॥ 9॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 3 | Sukta : 31 | Paryay : | Mantra No : 9
In English:
Seer : brahmaa | Devta : aayuH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : praaNena praaNataa.m praaNehaiva bhava maa mRRithaaH. vya1ha.m sarveNa paapmanaa vi yakShmeNa samaayuShaa . 9.
Component Words : praaNena . praaNataam . pra . ana . iha . eva . bhava . maa . mRRithaaH . vi . aham . sarveNa . paapmanaa . vi . yakShmeNa . sam . aayuShaa .31.9.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : आयुः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : आयु बढ़ाने का उपदेश।
पदपाठ : प्रा॒णेन॑ । प्रा॒ण॒ताम् । प्र । अ॒न॒ । इ॒ह । ए॒व । भ॒व॒ । मा । मृ॒था॒: । वि । अ॒हम् । सर्वे॑ण । पा॒प्मना॑ । वि । यक्ष्मे॑ण । सम् । आयु॑षा ॥३१.९॥
पदार्थ : (प्राणताम्) जीते हुओं के (प्राणेन) श्वास से (प्राण) श्वास ले, (इह) यहाँ पर (एव) ही (भव) रह, (मा मृथाः) मरा मत जा। (अहम्) मैं (सर्वेण पाप्मना) सब पाप कर्म से (वि) अलग और (यक्ष्मेण) राजरोग, क्षयी आदि से (वि=विवर्त्तै) अलग रहूँ और (आयुषा) जीवन [उत्साह] से (सम्=सम् वर्तै) मिला रहूँ ॥९॥"
भावार्थ : मनुष्य पुरुषार्थियों के समान अपने श्वास-श्वास पर कर्तव्य करे और संसार में रहकर भूल, आलस्य आदि दोष छोड़कर कीर्ति पावे ॥९॥
टिप्पणी :९−(प्राणेन) प्रकृष्टजीवनेन। श्वासप्रश्वासव्यापारेण। (प्राणताम्) प्र+अन जीवने-शतृ। श्वसताम्। आत्मवत्ताम्। (प्राण) प्राणान् धारय। (इह एव) अस्मिन्नेव जन्मनि लोके वा। (भव) वर्तस्व। अन्यद् गतम् ॥