Atharvaveda / 4 / 16 / 9
तैस्त्वा॒ सर्वै॑र॒भि ष्या॑मि॒ पाशै॑रसावामुष्यायणामुष्याः पुत्र। तानु॑ ते॒ सर्वा॑ननु॒संदि॑शामि ॥9॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 4 | Sukta : 16 | Paryay : | Mantra No : 9
In English:
Seer : brahmaa | Devta : varuNaH | Metre : tripaanmahaabRRihatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : taistvaa sarvairabhi Shyaami paashairasaavaamuShyaayaNaamuShyaaH putra. taanu te sarvaananusa.mdishaami .9.
Component Words : taiH . tvaa . sarvaiH . abhi . syaami . paashaiH . asau . aamuShyaayaNa . amuShyaaH . putra . taan . uu.m iti . te . sarvaan . anu.asa.mdishaami .16.9.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : वरुणः | छन्द : त्रिपान्महाबृहती | स्वर :
विषय : वरुण की सर्वव्यापकता का उपदेश।
पदपाठ : तै: । त्वा॒ । सर्वै॑: । अ॒भि । स्या॒मि॒ । पाशै॑: । अ॒सौ॒ । आ॒मु॒ष्या॒य॒ण॒ । अ॒मु॒ष्या॒: । पु॒त्र॒ । तान् । ऊं॒ इति॑ । ते॒ । सर्वा॑न् । अ॒नु॒ऽसंदि॑शामि ॥१६.९॥
पदार्थ : (असौ= असौ त्वम्) वह तू (आमुष्यायण) हे अमुक पिता के पुत्र ! और (अमुष्याः पुत्र) हे अमुक माता के पुत्र ! (त्वा) तुझको (तैः सर्वैः) उन सब (पाशैः) नियम बन्धनों से (अभि ष्यामि) मैं [वरुण] बाँधता हूँ, और (तान् सर्वान्) उन सबों को (उ) अवश्य (ते) तेरे लिये (अनुसंदिशामि) समीप से समझाता हूँ ॥९॥"
भावार्थ : परमेश्वर ने वेद द्वारा स्पष्ट दिखा दिया है कि सत्कर्म सुख के और दुष्कर्म दुःख के मूल हैं। इस लिये मनुष्य दुष्कर्मों को छोड़कर सत्कर्म करके आनन्द भोगें ॥९॥
टिप्पणी :९−(तैः) सुप्रसिद्धैः (त्वा) त्वां मनुष्यम् (सर्वैः) (अभि ष्यामि) अभिपूर्वः षो बन्धने। बध्नामि, अहं वरुणः (पाशैः) बन्धैः (असौ) स त्वम् (आमुष्यायण) अमुष्य, अदस् इत्यस्य षष्ठी, फक्, षष्ठ्या अलुक्। हे अमुष्य−पुरुषस्य पुत्र। हे प्रख्यातकुलोद्भव (अमुष्याः) स्त्रियाम् अदस्-षष्ठी। अमुकजनन्याः (पुत्र) (तान्) (सर्वान्) पाशान् (उ) अवश्यम् (ते) तुभ्यम् (अनुसंदिशामि) दिश दाने आज्ञापने। अनु सामीप्येन विज्ञापयामि निरूपयामि ॥