Atharvaveda / 5 / 4 / 9
उ॑त्त॒मो नाम॑ कुष्ठास्युत्त॒मो नाम॑ ते पि॒ता। यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॑ ना॒शय॑ त॒क्मानं॑ चार॒सं कृ॑धि ॥ 9॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 9
In English:
Seer : bhRRigva~NgiraaH | Devta : kuShThastakmanaashanaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : uttamo naama kuShThaasyuttamo naama te pitaa. yakShma.m cha sarva.m naashaya takmaana.m chaarasa.m kRRidhi . 9.
Component Words : ut.atamaH . naama . kuShTha . asi . ut.atamaH . naama . te . pitaa . yakShmam . cha . sarvam . naashaya . takmaanam . cha . arasam . kRRidhi .4.9.
In Hindi:
ऋषि : भृग्वङ्गिराः | देवता : कुष्ठस्तक्मनाशनः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : राजा के धर्म का उपदेश।
पदपाठ : उ॒त्ऽत॒म: । नाम॑ । कु॒ष्ठ॒ । अ॒सि॒ । उ॒त्ऽत॒म: । नाम॑ । ते॒ । पि॒ता । यक्ष्म॑म् । च॒ । सर्व॑म् । ना॒शय॑ । त॒क्मान॑म् । च॒ । अ॒र॒सम् । कृ॒धि॒ ॥४.९॥
पदार्थ : (कुष्ठ) हे गुणपरीक्षक राजन् ! तू (नाम) अवश्य (उत्तमः) अतिश्रेष्ठ (असि) है, (ते) तेरा (पिता) पिता (नाम) प्रसिद्ध (उत्तमः) अति उत्तम है। (सर्वम्) सब (यक्ष्मम्) राजरोग को (च) अवश्य (नाशय) नाश कर (च) और (तक्मानम्) दुःखित जीवन करनेवाले ज्वर को (अरसम्) असमर्थ (कृधि) बना ॥९॥"
भावार्थ : उत्तम गुणी राजा अपने उत्तम कुलका स्मरण करके प्रजा की दुःखों से सदा रक्षा करे ॥९॥
टिप्पणी :९−(उत्तमः) श्रेष्ठः (नाम) स्वीकारे। अवश्यम् (कुष्ठ) म० १ हे गुणपरीक्षक राजन् (असि) (उत्तमः) श्रेष्ठः (नाम) प्रसिद्धौ (ते) तव (पिता) पालकः। जनकः (यक्ष्मम्) अ० २।१०।५। राजरोगं क्षयम् (च) (सर्वम्) (नाशय) निवारय (तक्मानम्) म० १ कृच्छ्रजीवनकरं ज्वरम् (च) (अरसम्) असमर्थम् (कृधि) कुरु ॥९॥