Atharvaveda / 5 / 6 / 6
अवै॑तेनारात्सीरसौ॒ स्वाहा॑। ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒षेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः ॥ 6॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 6 | Paryay : | Mantra No : 6
In English:
Seer : atharvaa | Devta : somaarudrau | Metre : tripadaa viraaDgaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : avaitenaaraatsiirasau svaahaa. tigmaayudhau tigmahetii suShevau somaarudraaviha su mRRiData.m naH . 6.
Component Words : ava . etena . araatsiiH . asau . svaahaa . tigma.aaayudhau . tigmahetii iti tigma.ahetii . su.ashevau . somaarudrau . iha . su . mRRiDatam . naH .6.6.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : सोमारुद्रौ | छन्द : त्रिपदा विराड्गायत्री | स्वर :
विषय : सब सुख प्राप्ति का उपदेश।
पदपाठ : अव॑ । ए॒तेन॑ । अ॒रा॒त्सी॒: । अ॒सौ॒ । स्वाहा॑ । ति॒ग्मऽआ॑युधौ । ति॒ग्महे॑ती॒ इति॑ ति॒ग्मऽहे॑ती । सु॒ऽशेवौ॑ । सोमा॑रुद्रौ । इ॒ह । सु । मृ॒ड॒त॒म् । न॒: ॥६.६॥
पदार्थ : [हे परमेश्वर] (एतेन) अपनी व्याप्ति से (असौ) उस तूने अधर्मी को (अव अरात्सीः) निर्धन बनाया है, (स्वाहा) यह सुन्दर वाणी वा स्तुति है। (तिग्मायुधौ) हे तेज शस्त्रोंवाले, (तिग्महेती) पैने वज्रोंवाले, (सुशेवौ) बड़े सुखवाले (सोमारुद्रौ) ऐश्वर्य के कारण और ज्ञानदाता, अथवा चन्द्रमा और प्राण के तुल्य, राजा और वैद्य जनो, तुम दोनों (इह) यहाँ पर (सु) अच्छे प्रकार (नः) हमें (मृडतम्) सुखी करो ॥६॥"
भावार्थ : परमात्मा अधर्मियों को निर्धनी रखता है, सो राजा और वैद्य धार्मिक होकर प्रजा में सुख बढ़ाते रहें ॥६॥
टिप्पणी :६−(अव अरात्सीः) नीचै राद्धवान् निर्धनं कृतवानसि दुरात्मानम्। अन्यद् गतम्। म० ५ ॥