Atharvaveda / 5 / 6 / 14
इन्द्र॑स्य॒ वरू॑थमसि। तं त्वा॒ प्र प॑द्ये॒ तं त्वा॒ प्र वि॑शामि॒ सर्व॑गुः॒ सर्व॑पूरुषः॒ सर्वा॑त्मा॒ सर्व॑तनूः स॒ह यन्मेऽस्ति॒ तेन॑ ॥ 14॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 6 | Paryay : | Mantra No : 14
In English:
Seer : atharvaa | Devta : sarvaatmaa rudraH | Metre : pa~NktiH | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : indrasya varuuthamasi. ta.m tvaa pra padye ta.m tvaa pra vishaami sarvaguH sarvapuuruShaH sarvaatmaa sarvatanuuH saha yanme.asti tena . 14.
Component Words : indrasya . varuutham . asi .tam . tvaa . pra . padye . tam . tvaa . vishaami . sarva.aguH . sarva.apuruShaH . sarva.aaatmaa . sarva.atanuuH . saha . yat .me . asti . tena .6.14.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : सर्वात्मा रुद्रः | छन्द : पङ्क्तिः | स्वर :
विषय : सब सुख प्राप्ति का उपदेश।
पदपाठ : इन्द्र॑स्य । वरू॑थम् । अ॒सि॒ ।तम् । त्वा॒ । प्र । प॒द्ये॒ । तम् । त्वा॒ । वि॒शा॒मि॒ । सर्व॑ऽगु: । सर्व॑ऽपुरुष: । सर्व॑ऽआत्मा । सर्व॑ऽतनू: । स॒ह॒ । यत् ।मे॒ । अस्ति॑ । तेन॑ ॥६.१४॥
पदार्थ : [हे परमात्मन् !] तू (इन्द्रस्य) जीवात्मा का (वरूथम्) ढाल (असि) है। (सर्वगुः) सब गौ आदि पशुओं सहित, (सर्वपुरुषः) सब पुरुषों सहित, (सर्वात्मा) पूरे आत्मबलसहित, (सर्वतनूः) सब शरीर सहित मैं (तम् त्वा) उस तुझ को (प्र पद्ये) प्राप्त होता हूँ, (तम् त्वा) उस तुझ में (प्र विशामि) प्रवेश करता हूँ। और (यत्) जो कुछ (मे) मेरा (अस्ति) है (तेन सह) उसके साथ भी ॥१४॥"
भावार्थ : मनुष्य सब प्रकार से परमेश्वर की आज्ञापालन करके सदा प्रसन्नचित्त रहे ॥१४॥
टिप्पणी :१४−(वरूथम्) जृवृञ्भ्यामूथन्। उ० २।६। इति वृञ्−ऊथन्। शरीरावरकं शस्त्रम्। चर्म। फलकम्। अन्यत् पूर्ववत् म० ११ ॥