Atharvaveda / 5 / 23 / 5
ये क्रिम॑यः शिति॒कक्षा॒ ये कृ॒ष्णाः शि॑ति॒बाह॑वः। ये के च॑ वि॒श्वरू॑पा॒स्तान्क्रिमी॑न् जम्भयामसि ॥ 5॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 5
In English:
Seer : kaNvaH | Devta : indraH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ye krimayaH shitikakShaa ye kRRiShNaaH shitibaahavaH. ye ke cha vishvaruupaastaankrimiin jambhayaamasi . 5.
Component Words : ye . krimayaH . shiti.akakShaaH . ye . kRRiShNaaH . shiti.abaahavaH . ye . ke . cha . vishva.aruupaaH . taan . krimiin . jambhayaamasi .23.5.
In Hindi:
ऋषि : कण्वः | देवता : इन्द्रः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : छोटे-छोटे दोषों के नाश का उपदेश।
पदपाठ : ये । क्रिम॑य: । शि॒ति॒ऽकक्षा॑: । ये । कृ॒ष्णा: । शि॒ति॒ऽबाह॑व: । ये । के । च॒ । वि॒श्वऽरू॑पा: । तान् । क्रिमी॑न् । ज॒म्भ॒या॒म॒सि॒ ॥२३.५॥
पदार्थ : (ये) जो (क्रिमयः) कीड़े (शितिकक्षाः) काली काँखवाले, (ये) जो (कृष्णाः) काले वर्णवाले और (कृष्णबाहवः) काली भुजाओंवाले, (च) और (ये के) जो कोई (विश्वरूपाः) सब वर्णवाले हैं, (तान्) उन (क्रिमीन्) कीड़ों को (जम्भयामसि) हम नष्ट करते हैं ॥५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :५−(ये) (क्रिमयः) कीटाः (शितिकक्षाः) कृष्णकक्षावन्तः (कृष्णाः) श्यामवर्णाः (शितिबाहवः) कृष्णभुजाः (के) केचित् (च) (विश्वरूपाः) सर्ववर्णाः (तान्) पूर्वोक्तान् (क्रिमीन्) कीटान् (जम्भयामसि) नाशयामः ॥