Atharvaveda / 7 / 5 / 5
मु॒ग्धा दे॒वा उ॒त शुनाऽय॑जन्तो॒त गोरङ्गैः॑ पुरु॒धाऽय॑जन्त। य इ॒मं य॒ज्ञं मन॑सा चि॒केत॒ प्र णो॑ वोच॒स्तमि॒हेह ब्र॑वः ॥5॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 7 | Sukta : 5 | Paryay : | Mantra No : 5
In English:
Seer : atharvaa | Devta : aatmaa | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : mugdhaa devaa uta shunaa.ayajantota gora~NgaiH purudhaa.ayajanta. ya ima.m yaj~na.m manasaa chiketa pra No vochastamiheha bravaH .5.
Component Words : mugdhaaH . devaaH . uta . shunaa . ayajanta . uta . goH . a~NgaiH . puru.adhaa . ayajanta . yaH . imam . yaj~nam . manasaa . chiketa . pra . naH . vochaH. tam . iha . iha . bravaH .5.5.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : आत्मा | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या के लिये उपदेश।
पदपाठ : मु॒ग्धा: । दे॒वा: । उ॒त । शुना॑ । अय॑जन्त । उ॒त । गो: । अङ्गै॑: । पु॒रु॒ऽधा । अ॒य॒ज॒न्त॒ । य: । इ॒मम् । य॒ज्ञम् । मन॑सा । चि॒केत॑ । प्र । न॒: । वो॒च॒:। तम् । इ॒ह । इ॒ह । ब्र॒व॒: ॥५.५॥
पदार्थ : (देवाः) विद्वान् लोग [ईश्वर की सीमा के विषय में] (मुग्धाः) मूढ़ होकर (उत) भी (शुना) ज्ञान से [परमात्मा को] (अयजन्त) मिले हैं, (उत) और (गोः) वेदवाणी के (अङ्गैः) अङ्गों से [उसे] (पुरुधा) विविध प्रकार से (अयजन्त) पूजा है। (यः) जिस आपने (इमम् यज्ञम्) इस पूजनीय परमेश्वर को (मनसा) विज्ञान के साथ (चिकेत) जाना है, और जिस तूने (नः) हमें (प्र) अच्छे प्रकार (वोचः) उपदेश किया है, सो तू (तम्) उस परमेश्वर का (इह इह) यहाँ पर ही (ब्रवः) उपदेश कर ॥५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :५−(मुग्धाः) मोहिताः सन्तः (देवाः) विद्वांसः (उत) अपि (शुना) शुन गतौ-क्विप्। ज्ञानेन। शुनं सुखम्-निघ० ७।६। (अयजन्त) संगतवन्तः परमात्मानम् (गोः) वेदवाचः। गौः=वाक्-निघ० १।११। (अङ्गैः) (पुरुधा) बहुधा (अयजन्त) पूजितवन्तः। अन्यत्पूर्ववत्-अ० ७।२।१।