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Atharvaveda / 8 / 10 / 11

यन्त्य॑स्य॒ समि॑तिं सामि॒त्यो भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ 11॥

Veda : Atharvaveda
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| Paryay : | Sukta : 10 | Paryay : 1 | Mantra No : 11

In Hindi:

ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : साम्नी बृहती | स्वर :

विषय : ब्रह्म विद्या का उपदेश।

पदपाठ : यन्ति॑ । अ॒स्य॒ । सम्ऽइ॑तिम् । सा॒म्ऽइ॒त्य: । भ॒व॒ति॒ । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥१०.११॥

पदार्थ : [लोग] (अस्य) उसके (समितिम्) संग्राम में (यन्ति) जाते हैं, वह (सामित्यः) संग्रामयोग्य [शूर] (भवति) होता है, (यः एवम् वेद) जो ऐसा जानता है ॥११॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :११−(सामित्यः) परिषदो ण्यः। पा० ४।४।१०१। समिति-ण्य, बाहुलकात्। संग्रामे साधुः। शूरः। अन्यत् पूर्ववत् ॥