Atharvaveda / 9 / 1 / 12
यथा॒ सोमो॑ द्वि॒तीये॒ सव॑न इन्द्रा॒ग्न्योर्भ॑वति प्रि॒यः। ए॒वा म॑ इन्द्राग्नी॒ वर्च॑ आ॒त्मनि॑ ध्रियताम् ॥ 12॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 9 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 12
In English:
Seer : atharvaa | Devta : madhu, ashvinau | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : yathaa somo dvitiiye savana indraagnyorbhavati priyaH. evaa ma indraagnii varcha aatmani dhriyataam . 12.
Component Words : yathaa . somaH . dvitiiye . savane . indraagnyoH . bhavati . priyaH . eva . me . indraagnii iti . varchaH . aatmani . dhriyataam .1.12.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मधु, अश्विनौ | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : ब्रह्म की प्राप्ति का उपदेश।
पदपाठ : यथा॑ । सोम॑: । द्वि॒तीये॑ । सव॑ने । इ॒न्द्रा॒ग्न्यो: । भव॑ति । प्रि॒य: । ए॒व । मे॒ । इ॒न्द्रा॒ग्नी॒ इति॑ । वर्च॑: । आ॒त्मनि॑ । ध्रि॒य॒ता॒म् ॥१.१२॥
पदार्थ : (यथा) जैसे (सोमः) ऐश्वर्यवान् [युवा मनुष्य] (द्वितीये सवने) दूसरे यज्ञ [युवा अवस्था] में (इन्द्राग्न्योः) सूर्य और बिजुली [के समान माता-पिता] का (प्रियः) प्रिय (भवति) होता है। (एव) वैसे ही, (इन्द्राग्नी) हे सूर्य और बिजुली [के समान माता-पिता !] (मे आत्मनि) मेरे आत्मा में (वर्चः) प्रकाश (ध्रियताम्) धरा जावे ॥१२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१२−(सोमः) ऐश्वर्यवान्। युवा पुरुषः (द्वितीये) बाल्ययौवनयोः पूरके (सवने) यज्ञे यौवन इत्यर्थः (इन्द्राग्न्योः) सूर्यविद्युत्तुल्ययोर्मातापित्रोः (इन्द्राग्नी) हे सूर्यविद्युत्तुल्यौ मातापितरौ। अन्यत् पूर्ववत् ॥