Atharvaveda / 9 / 6 / 4 / 7
स य ए॒वं वि॒द्वान्मां॒समु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति। 7॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 4 | Sukta : 6 | Paryay : 10 | Mantra No : 7
In English:
Seer : brahmaa | Devta : atithiH, vidyaa | Metre : praajaapatyaanuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : sa ya eva.m vidvaanmaa.msamupasichyopaharati. 7.
Component Words : saH . yaH . evam . vidvaan . maa.msam . upa.asichya . upa.aharati .9.7.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : प्राजापत्यानुष्टुप् | स्वर :
विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।
पदपाठ : स: । य: । ए॒वम् । वि॒द्वान् । मां॒सम् । उ॒प॒ऽसिच्य॑ । उ॒प॒ऽहर॑ति ॥९.७॥
पदार्थ : (यः) जो [गृहस्थ] (एवम्) ऐसा (विद्वान्) विद्वान् है, (सः) वह (मांसम्) मननसाधक [बुद्धिवर्धक वस्तु] को (उपसिच्य) सिद्ध करके (उपहरति) भेंट करता है ॥७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :७, ८−(मांसम्) अ० ९।६(३)।९। मननसाधकं ज्ञानवर्धकं वस्तु (द्वादशाहेन) राजाहःसखिभ्यष्टच्। पा० ५।४।९१। द्वादशानामह्नां समाहारो यस्मिन् क्रतौ स क्रतुर्द्वादशाहः। द्वादशदिनसिद्धसोमयज्ञेन। अन्यत् पूर्ववत् ॥