Atharvaveda / 9 / 8 / 12
उ॒दरा॑त्ते क्लो॒म्नो नाभ्या॒ हृद॑या॒दधि॑। यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत् ॥ 12॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 9 | Sukta : 8 | Paryay : | Mantra No : 12
In English:
Seer : bhRRigva~NgiraaH | Devta : sarvashiirShaamayaapaakaraNam | Metre : anuShTubgarbhaa kakummatii chatuShpadoShNik | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : udaraatte klomno naabhyaa hRRidayaadadhi. yakShmaaNaa.m sarveShaa.m viSha.m niravochamaha.m tvat . 12.
Component Words : udaraat . te . klomnaH . naabhyaaH . hRRidayaat . adhi . yakShmaaNam . sarveShaam . viSham . niH . avocham . aham . tvat .13.12.
In Hindi:
ऋषि : भृग्वङ्गिराः | देवता : सर्वशीर्षामयापाकरणम् | छन्द : अनुष्टुब्गर्भा ककुम्मती चतुष्पदोष्णिक् | स्वर :
विषय : समस्त शरीर के रोग नाश का उपदेश। इस सूक्त का मिलान अ० का० २ सूक्त ३३ से करो।
पदपाठ : उ॒दरा॑त् । ते॒ । क्लो॒म्न: । नाभ्या॑: । हृद॑यात् । अधि॑ । यक्ष्मा॑णम् । सर्वे॑षाम् । वि॒षम् । नि: । अ॒वो॒च॒म् । अ॒हम् । त्वत् ॥१३.१२॥
पदार्थ : (ते) तेरे (उदरात्) उदर से, (क्लोम्नः) फेफड़े से, (नाभ्याः) नाभी से और (हृदयात् अधि) हृदय से भी, (सर्वेषाम्) सब (यक्ष्माणाम्) क्षयरोगों के (विषम्) विष को (त्वत्) तुझ से (अहम्) मैंने (निः) निकालकर (अवोचम्) बता दिया है ॥१२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१२−(क्लोम्नः) अ० २।३३।३। फुप्फुसात्। पिपासास्थानात् (अधि) अपि। अन्यत् सुगमम् ॥