Atharvaveda / 10 / 10 / 7
अनु॑ त्वा॒ग्निः प्रावि॑श॒दनु॒ सोमो॑ वशे त्वा। ऊध॑स्ते भद्रे प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युत॑स्ते॒ स्तना॑ वशे ॥ 7॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 10 | Sukta : 10 | Paryay : | Mantra No : 7
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : vashaa | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : anu tvaagniH praavishadanu somo vashe tvaa. uudhaste bhadre parjanyo vidyutaste stanaa vashe . 7.
Component Words : anu . tvaa . agniH . pra . avishat . anu . somaH . vashe . tvaa . uudhaH . te . bhadre . parjanyaH . vi.adyutaH . te . stanaaH . vashe .10.7.
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : वशा | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : ईश्वर शक्ति की महिमा का उपदेश।
पदपाठ : अनु॑ । त्वा॒ । अ॒ग्नि: । प्र । अ॒वि॒श॒त् । अनु॑ । सोम॑: । व॒शे॒ । त्वा॒ । ऊध॑: । ते॒ । भ॒द्रे॒ । प॒र्जन्य॑: । वि॒ऽद्युत॑: । ते॒ । स्तना॑: । व॒शे॒ ॥१०.७॥
पदार्थ : (वशे) हे वशा ! [कामनायोग्य परमेश्वरशक्ति] (त्वा अनु) तेरे पीछे-पीछे (अग्निः) अग्नि ने [पदार्थों में], (त्वा अनु) तेरे पीछे-पीछे (सोमः) प्रेरणा करनेवाले [जीवात्मा] ने [शरीर में] (प्र अविशत्) प्रवेश किया है। (भद्रे) हे कल्याणी ! (वशे) वशा ! (पर्जन्यः) मेघ (ते) तेरा (ऊधः) मेड़ [दुग्ध के छिद्रस्थान के समान] और (विद्युतः) बिजुलिएँ (ते) तेरे (स्तनाः) स्तन [दुग्ध के आधारों के समान] हैं ॥७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :७−(अनु) अनुसृत्य (त्वा) त्वाम् (अग्निः) पावकः (प्र अविशत्) प्रविष्टवान् (अनु) (सोमः) सोमः सूर्यः प्रसवनात्, सोम आत्माप्येतस्मादेव-निरु० १४।१२। शरीरस्य प्रेरको जीवात्मा (वशे) म० २। कमनीये परमात्मशक्ते (त्वा) (ऊधः) आपीनम् (ते) तव (भद्रे) हे कल्याणि (पर्जन्यः) मेघः (विद्युतः) तडितः (स्तनाः) दुग्धाधाराः ॥