Atharvaveda / 13 / 2 / 13
उ॒भावन्तौ॒ सम॑र्षसि व॒त्सः सं॑मा॒तरा॑विव। न॒न्वे॒तदि॒तः पु॒रा ब्रह्म॑ दे॒वा अ॒मी वि॑दुः ॥ 13॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 2 | Paryay : | Mantra No : 13
In English:
Seer : brahmaa | Devta : rohitaH, aadityaH, adhyaatmam | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ubhaavantau samarShasi vatsaH sa.mmaataraaviva. nanvetaditaH puraa brahma devaa amii viduH . 13.
Component Words : ubhau . antau . sam . arShasi . vatsaH . sa.mmaatarau.aiva. nanu . etat. itaH. puraa . brahma . devaaH . amii iti . viduH .2.13.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
पदपाठ : उ॒भौ । अन्तौ॑ । सम् । अ॒र्ष॒सि॒ । व॒त्स: । सं॒मा॒तरौ॑ऽइव। न॒नु । ए॒तत्। इ॒त:। पु॒रा । ब्रह्म॑ । दे॒वा: । अ॒मी इति॑ । वि॒दु॒: ॥2.१३॥
पदार्थ : [हे सूर्य !] तू (उभौ) दोनों (अन्तौ) अन्तों [पूर्व-पश्चिम अथवा आगे-पीछे दोनों ओर] को (सम्) ठीक-ठीक, (अर्षसि) पहुँचता है, (इव) जैसे (वत्सः) बालक (संमातरौ) दो सामान्य [मिली हुई] माताओं को। (ननु) निश्चय करके (एतत्) इस (ब्रह्म) ईश्वरज्ञान को (इतः पुरा) इस [समय] के पहिले से (अमी) यह (देवाः) विद्वान् लोग (विदुः) जानते हैं ॥१३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१३−(उभौ) द्वौ (अन्तौ) पूर्वापरौ पूर्वपश्चिमदेशौ वा (सम्) सम्यक् (अर्षसि) प्राप्नोषि (वत्सः) बालकः (संमातरौ) समानजनन्यौ (इव) यथा (ननु) निश्चयेन (एतत्) प्रत्यक्षम् (इतः) अस्मात् कालात् (पुरा) पूर्वम् (ब्रह्म) ईश्वरज्ञानम् (देवाः) विद्वांसः (अमी) वर्त्तमानाः (विदुः) जानन्ति ॥