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Atharvaveda / 13 / 4 / 23

भू॒तं च॒ भव्यं॑ च श्र॒द्धा च॒ रुचि॑श्च स्व॒र्गश्च॑ स्व॒धा च॑ ॥ 23॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 23

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम् | छन्द : आर्ची गायत्री | स्वर :

विषय : परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

पदपाठ : भू॒तम् । च॒ । भव्य॑म् । च॒ । श्र॒ध्दा । च॒ । रुचि॑: । च॒ । स्व॒ऽग: । च॒ । स्व॒धा । च॒ ॥६.२॥

पदार्थ : (भूतम्) अतीत वस्तु (च) और (भव्यम्) होनहार वस्तु (च) और (श्रद्धा) श्रद्धा [विश्वास] (च) और (रुचिः) रुचि [प्रीति] (च) और (स्वर्गः) स्वर्ग [आनन्द] (च च) और (स्वधा) आत्मधारण शक्ति [उस पुरुष के लिये होते हैं] ॥२३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२३−(भूतम्) अतीतं वस्तु (च) (भव्यम्) भविष्यद् वस्तु (च) (श्रद्धा) विश्वासः (रुचिः) प्रीतिः (च) (स्वर्गः) सुखप्रापकः। आनन्दः (च) (स्वधा) आत्मधारणशक्तिः (च) ॥