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Atharvaveda / 15 / 4 / 4

तस्मै॒दक्षि॑णाया दि॒शः ॥4॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :

विषय : परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।

पदपाठ : तस्मै॑ । दक्षि॑णाया: । दि॒श: ॥४.४॥

पदार्थ : (तस्मै) उस [विद्वान्]के लिये (दक्षिणायाः दिशः) दक्षिण दिशा से ॥४॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :४-स्पष्टम् ॥