Atharvaveda / 15 / 4 / 15
है॑म॒नावे॑नं॒मासौ॑ ध्रु॒वाया॑ दि॒शो गो॑पायतो॒ भूमि॑श्चा॒ग्निश्चानु॑ तिष्ठतो॒ य ए॒वं वेद॑॥15॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 15
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : nichRRidanuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : haimanaavena.mmaasau dhruvaayaa disho gopaayato bhuumishchaagnishchaanu tiShThato ya eva.m veda.15.
Component Words : haimanau . enam . maasau . dhruvaayaaH . dishaH . gopaayataH . bhuumiH . cha . agniH . cha . anu . tiShThataH . yaH . evam . veda .4.15.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : द्विपदार्ची पङ्क्ति | स्वर :
विषय : परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
पदपाठ : है॒म॒नौ । ए॒न॒म् । मासौ॑ । ध्रु॒वाया॑: । दि॒श: । गो॒पा॒य॒त॒: । भूमि॑: । च॒ । अग्नि॑: । च॒ । अनु॑ । ति॒ष्ठ॒त॒: । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥४.१५॥
पदार्थ : (हैमनौ) शीतवाले (मासौ) दो महीने (ध्रुवायाः दिशः) नीची दिशा से (एनम्) उस [विद्वान्] की (गोपायतः) रक्षा करते हैं, (च) और [दोनों] (भूमिः) भूमि (च) और (अग्निः) अग्नि [उसके लिये] (अनु तिष्ठतः) विहित कर्म करते हैं, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्)व्यापक [व्रात्य परमात्मा] को (वेद) जानता है ॥१५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१४, १५−(हैमनौ)सर्वत्राण् च तलोपश्च। पा० ४।३।२२। हेमन्त-अण्, तलोपः। शीतसम्बन्धिनौ।आग्रहायणपौषौ (भूमिम्) पृथिवीम् (अग्निम्) भौतिकाग्निम्। अन्यद् गतम् ॥