Atharvaveda / 15 / 7 / 2
तं प्र॒जाप॑तिश्चपरमे॒ष्ठी च॑ पि॒ता च॑ पिताम॒हश्चाप॑श्च श्र॒द्धा च॑ व॒र्षंभू॒त्वानु॒व्य᳡वर्तयन्त ॥2॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 7 | Paryay : | Mantra No : 2
In English:
Seer : atharvaa | Devta : adhyaatma athavaa vraaty | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ta.m prajaapatishchaparameShThii cha pitaa cha pitaamahashchaapashcha shraddhaa cha varSha.mbhuutvaanuvya᳡vartayanta .2.
Component Words : tam . prajaa.apatiH . cha . parame.asthii . cha . pa.Nitaa . cha . pitaamahaH . cha . aapaH . cha . shradhdaa . cha . varSham . bhuutvaa . anu.avya᳡vartayanta .7.2.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : एकपदा विराट् बृहती | स्वर :
विषय : परमात्माकी व्यापकता का उपदेश।
पदपाठ : तम् । प्र॒जाऽप॑ति: । च॒ । प॒र॒मे॒ऽस्थी । च॒ । पि॒ता । च॒ । पि॒ता॒म॒ह: । च॒ । आप॑: । च॒ । श्र॒ध्दा । च॒ । व॒र्षम् । भू॒त्वा । अ॒नु॒ऽव्य᳡वर्तयन्त ॥७.२॥
पदार्थ : (प्रजापतिः) प्रजापालक [राजा] (च च) और (परमेष्ठी) परमेष्ठी [सबसे ऊँचे पदवाला आचार्य वा संन्यासी] (च) और (पिता) बाप (च) और (पितामहः) दादा (च) और (आपः) सत्कर्म (च) और (श्रद्धा)श्रद्धा [धर्म मे प्रतीति] (वर्षम्) श्रेष्ठपन को (भूत्वा) पाकर (तम्) उस [व्रात्य परमात्मा] के (अनुव्यवर्तयन्त) पीछे विविध प्रकार वर्तमान हुए हैं ॥२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२−(तम्) व्रात्यम् (आपः) आपः कर्माख्यायां ह्रस्वो नुट् च वा। उ० ४।२०८। आप्लृव्याप्तौ-असुन्। सुकर्म (श्रद्धा) धर्मविश्वासः (वर्षम्) वृतॄवदिवचि०। उ० ३।६२।वृञ् वरणे-स प्रत्ययः। वरत्वं श्रेष्ठताम् (भूत्वा) भू प्राप्तौ-क्त्वा।प्राप्य (अनुव्यवर्तयन्त) अनुसृत्य वर्तमाना अभवन्। अन्यत् पूर्ववत्-सू० ६। म०२५ ॥