Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 15 / 8 / 1

सो᳡ऽर॑ज्यत॒ ततो॑राज॒न्यो᳡ऽजायत ॥1॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 8 | Paryay : | Mantra No : 1

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : साम्नी उष्णिक् | स्वर :

विषय : परमेश्वर की प्रभुता का उपदेश।

पदपाठ : स: । अ॒र॒ज्य॒त॒ । तत॑: । राज॒न्य᳡: । अ॒जा॒य॒त॒ ॥८.१॥

पदार्थ : (सः) उस [व्रात्यपरमात्मा] ने (अरज्यत) प्रेम किया, (ततः) उसी से वह (राजन्यः) सर्वस्वामी (अजायत) हुआ ॥१॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१−(सः) व्रात्यः परमात्मा (अरज्यत) रञ्ज रागे, आसक्तौ प्रीतौ च-लङ्, दिवादिः। प्रीतियुक्तोऽभवत् सृष्टौ (ततः) तस्मात् कारणात् (राजन्यः) राजेरन्यः। उ० ३।१००। राजृ दीप्तौ ऐश्वर्येच-अन्य। सर्वस्वामी (अजायत) प्रादुरभवत् ॥