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Atharvaveda / 15 / 10 / 10

ऐन॑मिन्द्रि॒यंग॑च्छतीन्द्रि॒यवा॑न्भवति ॥10॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 10 | Paryay : | Mantra No : 10

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : द्विपदासुरी गायत्री | स्वर :

विषय : अतिथिसत्कार की महिमा का उपदेश।

पदपाठ : आ । ए॒न॒म् । इ॒न्द्रि॒यम् । ग॒च्छ॒ति॒ । इ॒न्द्रि॒यऽवा॑न् । भ॒व॒ति॒ ॥१०.१०॥

पदार्थ : (एनम्) उस [पुरुषार्थी] को (इन्द्रियम्) ऐश्वर्य (आ) आकर (गच्छति) मिलता है, वह (इन्द्रियवान्) ऐश्वर्यवान् (भवति) होता है ॥१०॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१०−(आ) आगत्य (एनम्)पुरुषार्थिनम् (इन्द्रियम्) इन्द्रचिह्नम्। ऐश्वर्यम् (गच्छति) प्राप्नोति (इन्द्रियवान्) ऐश्वर्यवान् (भवति) ॥