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Atharvaveda / 15 / 15 / 1

तस्य॒व्रात्य॑स्य ॥1॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 15 | Sukta : 15 | Paryay : | Mantra No : 1

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : अध्यात्म अथवा व्रात्य | छन्द : दैवी पङ्क्ति | स्वर :

विषय : अतिथि के सामर्थ्य का उपदेश।

पदपाठ : तस्य॑ । व्रात्य॑स्य ॥१५.१॥

पदार्थ : (तस्य) उस (व्रात्यस्य) व्रात्य [सत्यव्रतधारी अतिथि] के ॥१॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१−(तस्य) तादृशस्य (व्रात्यस्य) सत्यव्रतधारिणोऽतिथेः ॥