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Atharvaveda / 16 / 2 / 2

मधु॑मती स्थ॒मधु॑मतीं॒ वाच॑मुदेयम् ॥2॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 16 | Sukta : 2 | Paryay : | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : वाक् | छन्द : आसुरी उष्णिक् | स्वर :

विषय : इन्द्रियों की दृढ़ता का उपदेश।

पदपाठ : मधु॑ऽमती: । स्थ॒ । मधु॑ऽमतीम् । वाच॑म् । उ॒दे॒य॒म् ॥२.२॥

पदार्थ : [हे प्रजाओ !] तुम (मधुमतीः) ज्ञानवाली (स्थ) हो, (मधुमतीम्) ज्ञानयुक्त (वाचम्) वाणी (उदेयम्) मैंबोलूँ ॥२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२−(मधुमतीः) ज्ञानवत्यःप्रजाः (स्थ) भवथ (मधुमतीम्) ज्ञानवतीम् (वाचम्) वाणीम् (उदेयम्) अ० ३।२०।१०।उद्यासम् ॥