Atharvaveda / 18 / 1 / 15
ब॒तो ब॑तासि यम॒नैव ते॒ मनो॒ हृद॑यं चाविदा॒म। अ॒न्या किल॒ त्वां क॒क्ष्ये᳡व यु॒क्तं परि॑ष्वजातौ॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम् ॥15॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 18 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 15
In English:
Seer : atharvaa | Devta : yama, mantrokt | Metre : tripadaa viraaTshakvarii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : bato bataasi yamanaiva te mano hRRidaya.m chaavidaama. anyaa kila tvaa.m kakShye᳡va yukta.m pariShvajaatau libujeva vRRikSham .15.
Component Words : bataH . bata . asi . yama . na . eva . te . manaH . hRRidayam . cha . avidaama . anyaa . kila . tvaam . kakShyaa᳡.aiva . yuktam . pari . svajaatai . libujaa.aiva . vRRikSham .1.15.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : यम, मन्त्रोक्त | छन्द : आर्षी पङ्क्ति | स्वर :
विषय : भाई-बहिन के परस्पर विवाह के निषेध का उपदेश।
पदपाठ : ब॒त: । ब॒त॒ । अ॒सि॒ । य॒म॒ । न । ए॒व । ते॒ । मन॑: । हृद॑यम् । च॒ । अ॒वि॒दा॒म॒ । अ॒न्या । किल॑ । त्वाम् । क॒क्ष्या᳡ऽइव । यु॒क्तम् । परि॑ । स्व॒जा॒तै॒ । लिबु॑जाऽइव । वृ॒क्षम् ॥१.१५॥
पदार्थ : (बत) हा ! (यम) हे यम ! [जोड़िया भाई] तू (बतः) बड़ा निर्बल (असि) है, (ते) तेरे (मनः) मन [संकल्प] को (च) और (हृदयम्) हृदय [निश्चय] को (एव) निःसन्देह (न अविदाम) हम ने नहीं पाया। (अन्या) दूसरी स्त्री (किल) अवश्य (त्वाम्) तुझ से (परि ष्वजातै) आलिङ्गन करेगी, (कक्ष्या इव) जैसे घोड़े की पेटी (युक्तम्) कसे हुए [घोड़े] से और (लिबुजा इव)जैसे बेल [लता] (वृक्षम्) वृक्ष से [लिपट जाती है] ॥१५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१५−(बतः) वन उपकारे उपतापे च-क्त। बतो बलादतीतो भवतिदुर्बलः-निरु० ६।२८। अतिनिर्बलः (बत) शोके। हा (असि) (यम) म० ८। हे यमजभ्रातः (न) निषेधे (एव) निश्चयेन (ते) तव (मनः) चित्तम् संकल्पम् (हृदयम्) अन्तःकरणम्।निश्चयम् (च) (अविदाम) विद् लाभे-लुङ्। वयं प्राप्तवत्यः (अन्या) मद्भिन्नास्त्री (किल) प्रसिद्धौ (त्वाम्) (कक्ष्या) अश्वस्य कक्षप्रदेशस्था रज्जुः (इव)यथा (युक्तम्) गमनाय योजितमश्वम् (परिष्वजातै) आलिङ्गेत् (लिबुजा) अ० ६।८।१। लता (वृक्षम्) तरुम् ॥