Atharvaveda / 19 / 19 / 7
स॑मु॒द्रो न॒दीभि॒रुद॑क्राम॒त्तां पुरं॒ प्र ण॑यामि वः। तामा वि॑शत॒ तां प्र वि॑शत॒ सा वः॒ शर्म॑ च॒ वर्म॑ च यच्छतु ॥ 7॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 19 | Paryay : | Mantra No : 7
In English:
Seer : atharvaa | Devta : chandramaaH, mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : samudro nadiibhirudakraamattaa.m pura.m pra Nayaami vaH. taamaa vishata taa.m pra vishata saa vaH sharma cha varma cha yachChatu . 7.
Component Words : samudraH. nadiibhiH. ut. akraamat. taam. puram. pra. nayaami. vaH. taam. aa. vishata. taam. pra. vishata. saa. vaH. sharma. cha. varma. cha. yachChatu .19.7.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताः | छन्द : अनुष्टुब्गर्भा पङ्क्तिः | स्वर :
विषय : रक्षा के प्रयत्न का उपदेश।
पदपाठ : स॒मु॒द्रः। न॒दीभिः॑। उत्। अ॒क्रा॒म॒त्। ताम्। पुर॑म्। प्र। न॒या॒मि॒। वः॒। ताम्। आ। वि॒श॒त॒। ताम्। प्र। वि॒श॒त॒। सा। वः॒। शर्म॑। च॒। वर्म॑। च॒। य॒च्छ॒तु॒ ॥१९.७॥
पदार्थ : (समुद्रः) समुद्र [जलसमूह] (नदीभिः) नदियों के साथ (उत् अक्रामत्) ऊँचा चढ़ा है, (ताम्) उस (पुरम्) अग्रगामिनी शक्ति [वा दुर्गरूप परमेश्वर] की ओर (वः) तुम्हें (प्र) आगे (नयामि) लिये चलता हूँ। (ताम्) उस [शक्ति] में (आ विशत) तुम घुस जाओ, (ताम्) उसमें (प्र विशत) तुम भीतर जाओ, (सा) वह [शक्ति] (वः) तुम्हें (शर्म) सुख (च च) और (वर्म) कवच [रक्षा साधन] (यच्छन्तु) देवे ॥७॥"
भावार्थ : टिप्पणी :७−(समुद्रः) जलौघः (नदीभिः)। सरिद्भिः। अन्यद् गतम् ॥