Atharvaveda / 19 / 19 / 9
इन्द्रो॑ वी॒र्ये॒णोद॑क्राम॒त्तां पुरं॒ प्र ण॑यामि वः। तामा वि॑शत॒ तां प्र वि॑शत॒ सा वः॒ शर्म॑ च॒ वर्म॑ च यच्छतु ॥ 9॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 19 | Paryay : | Mantra No : 9
In English:
Seer : atharvaa | Devta : chandramaaH, mantroktaaH | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : indro viiryeNodakraamattaa.m pura.m pra Nayaami vaH. taamaa vishata taa.m pra vishata saa vaH sharma cha varma cha yachChatu . 9.
Component Words : indraH. viirye᳡Na. ut. akraamat. taam. puram. pra. nayaami. vaH. taam. aa. vishata. taam. pra. vishata. saa. vaH. sharma. cha. varma. cha. yachChatu .19.9.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताः | छन्द : भुरिग्बृहती | स्वर :
विषय : रक्षा के प्रयत्न का उपदेश।
पदपाठ : इन्द्रः॑। वी॒र्ये᳡ण। उत्। अ॒क्रा॒म॒त्। ताम्। पुर॑म्। प्र। न॒या॒मि॒। वः॒। ताम्। आ। वि॒श॒त॒। ताम्। प्र। वि॒श॒त॒। सा। वः॒। शर्म॑। च॒। वर्म॑। च॒। य॒च्छ॒तु॒ ॥१९.९॥
पदार्थ : (इन्द्रः) इन्द्र [परम ऐश्वर्यवान् पुरुष] (वीर्येण) वीरता से (उत् अक्रामत्) ऊँचा चढ़ा है, (ताम्) उस (पुरम्) अग्रगामिनी शक्ति [वा दुर्गरूप परमेश्वर] की ओर (वः) तुम्हें (प्र) आगे (नयामि) लिये चलता हूँ। (ताम्) उस [शक्ति] में (आ विशत) तुम घुस जाओ, (ताम्) उसमें (प्र विशत) तुम भीतर जाओ, (सा) वह [शक्ति] (वः) तुम्हें (शर्म) सुख (च च) और (वर्म) कवच [रक्षा साधन] (यच्छन्तु) देवे ॥९॥"
भावार्थ : टिप्पणी :९−(इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् पुरुषः (वीर्येण) वीरकर्मणा। अन्यद् गतम् ॥