Atharvaveda / 19 / 23 / 12
प॑ञ्चदश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 12॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 12
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : pa~nchadasharchebhyaH svaahaa . 12.
Component Words : pa~nchadasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.12.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : प॒ञ्च॒द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.१२॥
पदार्थ : (पञ्चदशर्चेभ्यः) पन्द्रह [शुक्ल, नील, पीत, रक्त, हरित, कपिश, चित्र ये सात रूप, तथा मधुर, अम्ल, कटु, कषाय, तिक्त ये छह रस और सुरभि, असुरभि दो प्रकार का गन्ध, इन पन्द्रह] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१२−(पञ्चदशर्चेभ्यः) म०१। शुक्लनीलपीतरक्तहरितकपिशचित्रसप्तरूपाणि, मधुराम्ललवणकटुकषायतिक्त-षड्रसाः, सुरभिश्चासुरभिश्चेति गन्धौ। इत्येतेषां पञ्चदशानां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥