Atharvaveda / 19 / 23 / 22
ए॑कानृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 22॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 22
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ekaanRRichebhyaH svaahaa . 22.
Component Words : eka.aanRRichebhyaH. svaahaa .23.22.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : दैवी जगती | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : ए॒क॒ऽअ॒नृ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.२२॥
पदार्थ : (एकानृचेभ्यः) एक [परमात्मा] की अत्यन्त ही स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥२२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२२−(एकानृचेभ्यः) म०१। नास्ति ऋक् स्तुत्या विद्या यस्याः सकाशादिति अनृचः। एकस्य परमेश्वरस्य अतिशयेन स्तुत्यविद्यायुक्तेभ्यो वेदेभ्यः ॥