Atharvaveda / 19 / 29 / 4
मृ॒ण द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे मृ॒ण मे॑ पृतनाय॒तः। मृ॒ण मे॒ सर्वा॑न्दु॒र्हार्दो॑ मृ॒ण मे॑ द्विष॒तो म॑णे ॥ 4॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 29 | Paryay : | Mantra No : 4
In English:
Seer : brahmaa | Devta : darbhamaNiH | Metre : tryasaanaa ShaTpadaa jagatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : mRRiNa darbha sapatnaanme mRRiNa me pRRitanaayataH. mRRiNa me sarvaandurhaardo mRRiNa me dviShato maNe . 4.
Component Words : mRRiNa. darbha. sa.apatnaan. me. mRRiNa. me. pRRitanaa.ayataH. mRRiNa. me. sarvaan. duH.ahaardaH. mRRiNa. me. dviShataH. maNe .29.4.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : दर्भमणिः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : सेनापति के लक्षण का उपदेश ॥
पदपाठ : मृ॒ण। द॒र्भ॒। स॒ऽपत्ना॑न्। मे॒। मृ॒ण। मे॒। पृ॒त॒ना॒ऽय॒तः। मृ॒ण। मे॒। सर्वा॑न्। दुः॒ऽहार्दः॑। मृ॒ण। मे॒। द्वि॒ष॒तः। म॒णे॒ ॥२९.४॥
पदार्थ : (दर्भ) हे दर्भ ! [शत्रुविदारक सेनापति] (मे) मेरे (सपत्नान्) वैरियों को (मृण) मार डाल, (मे) मेरे लिये (पृतनायतः) सेना चढ़ा लानेवालों को (मृण) मार डाल। (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दुर्हार्दः) दुष्ट हृदयवालों को (मृण) मार डाल, (मणे) हे प्रशंसनीय ! (मे) मेरे (द्विषतः) वैरियों को (मृण) मार डाल ॥४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :४−(मृण) मृण हिंसायाम्। मारय ॥