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Atharvaveda / 20 / 39 / 3

उद्गा आ॑ज॒दङ्गि॑रोभ्य आ॒विष्कृ॒ण्वन्गुहा॑ स॒तीः। अ॒र्वाञ्चं॑ नुनुदे व॒लम् ॥ 3॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 39 | Paryay : | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : गोषूक्तिः, अश्वसूक्तिः | देवता : इन्द्रः | छन्द : गायत्री | स्वर :

विषय : परमेश्वर की उपासना का उपदेश।

पदपाठ : उत् गाः आजत् अङ्गि॑रोभ्यः आविः कृण्वन् गुहा सतीः। अर्वाञ्चम् नुनुदे वलम्॥

पदार्थ : (गुहा) गुहा [गुप्त अवस्था] में (सतीः) वर्तमान (गाः) वाणियों को (आविः कृण्वन्) प्रकट करते हुए उस [परमेश्वर] ने (अङ्गिरोभ्यः) विज्ञानी पुरुषों के लिये (उत् आजत्) ऊँचा पहुँचाया और (वलम्) हिंसक [विघ्न] को (अर्वाञ्चन्) नीचे (नुनुदे) हटाया ॥३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :३−मन्त्राः २- व्याख्याताः-अ०२–०।२८।१-४॥