Atharvaveda / 20 / 116 / 2
अम॑न्म॒हीद॑ना॒शवो॑ऽनु॒ग्रास॑श्च वृत्रहन्। सु॒कृत्सु ते॑ मह॒ता शू॑र॒ राध॒सानु॒ स्तोमं॑ मुदीमहि ॥ 2॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 116 | Paryay : | Mantra No : 2
In English:
Seer : medhyaatithiH | Devta : indraH | Metre : jagatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : amanmahiidanaashavo.anugraasashcha vRRitrahan. sukRRitsu te mahataa shuura raadhasaanu stoma.m mudiimahi . 2.
Component Words : amanmahi . it . anaashavaH . anugraasaH . cha . vRRitra.ahan . sukRRit . su . te . mahataa . shuura . raadhasaa . anu . stomam . mudiimahi .116.2.
In Hindi:
ऋषि : मेध्यातिथिः | देवता : इन्द्रः | छन्द : बृहती | स्वर :
विषय : राजा के कर्म का उपदेश।
पदपाठ : अम॑न्महि । इत् । अ॒ना॒शव॑: । अ॒नु॒ग्रास॑: । च॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् ॥ सु॒कृत् । सु । ते॒ । म॒ह॒ता । शू॒र॒ । राध॑सा । अनु॑ । स्तोम॑म् । मु॒दी॒म॒हि॒ ॥११६.२॥
पदार्थ : (वृत्रहन्) हे शत्रुनाशक ! [राजन्] (अनाशवः) अनफुरतीले (च) और (अनुग्रासः) अनतेज (इत्) ही (अमन्महि) हम जाने गये हैं। (शूर) हे शूर ! (ते) तेरे (महता) बड़े (राधसा) धन से (स्तोमम् अनु) बड़ाई के साथ (सकृत्) एक बार (सु) भले प्रकार (मदीमहि) हम आनन्द पावें ॥२॥"
भावार्थ : टिप्पणी :२−(अमन्महि) म० १। ज्ञाता अभूम (इत्) एव (अनाशवः) अशीघ्राः, अत्वरमाणाः (अनुग्रासः) अनुग्राः। निस्तेजसः (च) (वृत्रहन्) शत्रुनाशक राजन् (सकृत्) एकवारम् (सु) (ते) तव (महता) प्रभूतेन (शूर) (राधसा) धनेन (अनु) अनुलक्ष्य (स्तोमम्) स्तुत्यं गुणम् (मुदीमहि) आनन्देम ॥