Atharvaveda / 20 / 129 / 11
अ॒यन्म॒हा ते॑ अर्वा॒हः ॥ 11॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 129 | Paryay : | Mantra No : 11
In English:
Seer : | Devta : prajaapatiH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : ayanmahaa te arvaahaH . 11.
Component Words : ayat . mahaa . te . arvaahaH .129.11.
In Hindi:
ऋषि : | देवता : प्रजापतिः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : मनुष्य के लिये प्रयत्न का उपदेश।
पदपाठ : अ॒यत् । म॒हा । ते॒ । अर्वा॒ह: ॥१२९.११॥
पदार्थ : [हे स्त्री !] (अर्वाहः) ज्ञान पहुँचानेवाला [मनुष्य] (महा) महत्त्व के साथ (ते) तेरे लिये (अयत्) प्राप्त होता है ॥११॥"
भावार्थ : टिप्पणी :११−(अयत्) अयते। प्राप्यते (महा) मह पूजायाम् क्विप्। महत्त्वेन (ते) तुभ्यम् (अर्वाहः) ऋ गतौ-विच्+वह प्रापणे-अण्। ज्ञानप्रापको विद्वान् ॥