Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 20 / 129 / 13

सघा॑घते॒ गोमी॒द्या गोग॑ती॒रिति॑ ॥ 13॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 129 | Paryay : | Mantra No : 13

In Hindi:

ऋषि : | देवता : प्रजापतिः | छन्द : साम्नी गायत्री | स्वर :

विषय : मनुष्य के लिये प्रयत्न का उपदेश।

पदपाठ : सघा॑घते॒ । गोमीद्या । गोगी॑ती॒: । इति॑ ॥१२९.१३॥

पदार्थ : (गोमीद्या) वेदवाणी जाननेवाली [स्त्री] (गोगतीः) पृथिवी पर गतिवाली [प्रजाओं] को (सघाघते) सहाय करती हैं, (इति) ऐसा [निश्चय] हैं ॥१३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१३−(सघाघते) म० १। साहयते (गोमीद्या) गौर्वाङ्नाम-निघ० १।११। अघ्न्यादयश्च। उ० ४।११२। मिदृ मेधाहिंसनयोः-यक्, टाप्, दीर्घश्च। गां वेदवाणीं मेदते प्रजानाति या सा (गोगतीः) गवि पृथिव्यां गतियुक्ताः प्रजाः (इति) एवमस्ति ॥