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Atharvaveda / 20 / 132 / 9

क ए॑षां दु॒न्दुभिं॑ हनत् ॥ 9॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 20 | Sukta : 132 | Paryay : | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : | देवता : प्रजापतिः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :

विषय : परमात्मा के गुणों का उपदेश।

पदपाठ : क: । एषाम् । दु॒न्दुभि॑म् । हनत् ॥१३२.९॥

पदार्थ : (कः) कौन (एषाम्) इनके बीच (दुन्दुभिम्) दुन्दुभि [ढोल] (हनत्) बजावे ॥९॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :९−(कः) (एषाम्) (दन्दुभिम्) अथ० ।२०।१। बृहड्ढक्काम् (हनत्) वादयेत् ॥