Rigveda / 7 / 66 / 7
प्रति॑ वां॒ सूर॒ उदि॑ते मि॒त्रं गृ॑णीषे॒ वरु॑णम् । अ॒र्य॒मणं॑ रि॒शाद॑सम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 7 | Sukta : 66 | Mantra No : 7
In English:
Seer : vasiShThaH | Devta : aadityaaH | Metre : aarShiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : prati vaa.m suura udite mitra.m gRRiNiiShe varuNam . aryamaNa.m rishaadasam .
Component Words : prati . vaam . suure . ut.aite . mitram . gRRiNiiShe . varuNam . aryamaNam . rishaadasam . 7.66.7
In Hindi:
ऋषि : वसिष्ठः | देवता : आदित्याः | छन्द : आर्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : प्रति॑ । वा॒म् । सूरे॑ । उत्ऽइ॑ते । मि॒त्रम् । गृ॒णी॒षे॒ । वरु॑णम् । अ॒र्य॒मण॑म् । रि॒शाद॑सम् ॥ ७.६६.७
पदार्थ : (वां) हे राजा तथा प्रजाजनों ! तुममें से (सूरे, उदिते) सूर्योदयकाल में (प्रति) प्रत्येक मनुष्य (मित्रं) सर्वप्रिय (वरुणं) सब के उपासनीय परमात्मा की (गृणीषे) उपासना करे, जो (अर्यमणं) न्यायकारी और (रिशादसं) अज्ञान का नाशक है ॥७॥
भावार्थ : परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे राजा तथा प्रजा के लोगो ! तुम्हारा सबका यह कर्त्तव्य है कि तुम प्रात:काल उठकर पूजनीय परमात्मा की उपासना करो, जो किसी का पक्षपात नहीं करता और वह स्वकर्मानुसार सबको शुभाशुभ फल देता है। ऐसे न्यायाधीश को लक्ष्य रखकर उपासना करने से मनुष्य स्वयं भी न्यायकारी और धर्मात्मा बन जाता है ॥७॥
In Sanskrit:
ऋषि : वसिष्ठः | देवता : आदित्याः | छन्द : आर्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : प्रति॑ । वा॒म् । सूरे॑ । उत्ऽइ॑ते । मि॒त्रम् । गृ॒णी॒षे॒ । वरु॑णम् । अ॒र्य॒मण॑म् । रि॒शाद॑सम् ॥ ७.६६.७
भावार्थ :