Rigveda / 8 / 3 / 15
उदु॒ त्ये मधु॑मत्तमा॒ गिर॒: स्तोमा॑स ईरते । स॒त्रा॒जितो॑ धन॒सा अक्षि॑तोतयो वाज॒यन्तो॒ रथा॑ इव ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 3 | Mantra No : 15
In English:
Seer : medhyaatithiH kaaNvaH | Devta : indra: | Metre : bRRihatii | Tone : madhyamaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : udu tye madhumattamaa giraH stomaasa iirate . satraajito dhanasaa akShitotayo vaajayanto rathaa iva .
Component Words : ut . uu.N iti . tye . madhumat.atamaaH . giraH . stomaasaH . iirate . satraa.ajitaH . dhana.asaaH . akShita.auutayaH . vaajayantaH . rathaaH.aiva . 8.3.15
In Hindi:
ऋषि : मेध्यातिथिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : बृहती | स्वर : मध्यमः
विषय :
पदपाठ : उत् । ऊँ॒ इति॑ । त्ये । मधु॑मत्ऽतमाः । गिरः॑ । स्तोमा॑सः । ई॒र॒ते॒ । स॒त्रा॒ऽजितः॑ । ध॒न॒ऽसाः । अक्षि॑तऽऊतयः । वा॒ज॒यन्तः॑ । रथाः॑ऽइव ॥ ८.३.१५
पदार्थ : (त्ये, मधुमत्तमाः, गिरः) वे आपके लिये मधुर वाणियें और (स्तोमासः) स्तोत्र (उ, उदीरते) निकल रहे हैं, जिस प्रकार (सत्राजितः) साथ जीतनेवाले (धनसाः) धन चाहनेवाले (अक्षितोतयः) दृढ़ रक्षावाले (वाजयन्तः) बल चाहनेवाले (रथाः, इव) रथ निकलते हैं ॥१५॥
भावार्थ : हे कर्मयोगिन् ! जिस प्रकार संग्राम में विजयप्राप्त करनेवाले, धन की इच्छावाले, दृढ़ रक्षावाले, बल की चाहनावाले रथ समान उद्देश्य को लेकर शीघ्रता से निकलते हैं, इसी प्रकार मधुर वाणियों द्वारा स्तोता लोग समान उद्देश्य से आपकी स्तुति गायन कर रहे हैं, हे प्रभो ! आप उनको ऐश्वर्य्यसम्पन्न करें ॥१५ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : मेध्यातिथिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : बृहती | स्वर : मध्यमः
पदपाठ : उत् । ऊँ॒ इति॑ । त्ये । मधु॑मत्ऽतमाः । गिरः॑ । स्तोमा॑सः । ई॒र॒ते॒ । स॒त्रा॒ऽजितः॑ । ध॒न॒ऽसाः । अक्षि॑तऽऊतयः । वा॒ज॒यन्तः॑ । रथाः॑ऽइव ॥ ८.३.१५
भावार्थ :