Rigveda / 8 / 6 / 46
श॒तम॒हं ति॒रिन्दि॑रे स॒हस्रं॒ पर्शा॒वा द॑दे । राधां॑सि॒ याद्वा॑नाम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 6 | Mantra No : 46
In English:
Seer : vatsaH kaaNvaH | Devta : tirindirasya paarashavyasya daanastutiH | Metre : viraaDaarShiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : shatamaha.m tirindire sahasra.m parshaavaa dade . raadhaa.msi yaadvaanaam .
Component Words : shatam . aham . tirindire . sahasram . parshau . aa . dade . raadhaa.msi . yaadvaanaam . 8.6.46
In Hindi:
ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : तिरिन्दिरस्य पारशव्यस्य दानस्तुतिः | छन्द : विराडार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : श॒तम् । अ॒हम् । ति॒रिन्दि॑रे । स॒हस्र॑म् । पर्शौ॑ । आ । द॒दे॒ । राधां॑सि । याद्वा॑नाम् ॥ ८.६.४६
पदार्थ : (याद्वानाम्) मनुष्यों में (तिरिन्दिरे) जो अज्ञाननाशक हैं, उनके निमित्त (शतम्) सौ प्रकार का धन (पर्शौ) जो दूसरों को देता है, उसके लिये (सहस्रम्, राधांसि) सहस्र प्रकार के धनों को (अहम्) मैं (आददे) धारण करता हूँ ॥४६॥
भावार्थ : इस मन्त्र का भाव यह है कि कर्मानुसार यथाभाग सबको देनेवाला परमात्मा ज्ञानशील तथा परोपकारी पुरुषों को सैकड़ों तथा सहस्रों प्रकार के पदार्थ प्रदान करता है ॥४६ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : वत्सः काण्वः | देवता : तिरिन्दिरस्य पारशव्यस्य दानस्तुतिः | छन्द : विराडार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : श॒तम् । अ॒हम् । ति॒रिन्दि॑रे । स॒हस्र॑म् । पर्शौ॑ । आ । द॒दे॒ । राधां॑सि । याद्वा॑नाम् ॥ ८.६.४६
भावार्थ :