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Rigveda / 8 / 7 / 4

वप॑न्ति म॒रुतो॒ मिहं॒ प्र वे॑पयन्ति॒ पर्व॑तान् । यद्यामं॒ यान्ति॑ वा॒युभि॑: ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 7 | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : पुनर्वत्सः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : वप॑न्ति । म॒रुतः॑ । मिह॑म् । प्र । वे॒प॒य॒न्ति॒ । पर्व॑तान् । यत् । याम॑म् । यान्ति॑ । वा॒युऽभिः॑ ॥ ८.७.४

पदार्थ : (यत्) जब (वायुभिः) सेनासहित (मरुतः) योद्धा लोग (यामम्, यान्ति) यानारूढ होते हैं, तब (मिहम्, वपन्ति) शस्त्रवृष्टि करते हैं और (पर्वतान्) दुर्गप्रदेशों को (प्रवेपयन्ति) कँपा देते हैं ॥४॥

भावार्थ : जो लोग व्योमयानादि द्वारा=विद्यानिर्मित यानों द्वारा शत्रु पर आक्रमण करते हैं, वे ही शत्रुबल को कम्पायमान कर सकते हैं, अन्य नहीं ॥४ ॥