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Rigveda / 8 / 7 / 7

उदु॒ त्ये अ॑रु॒णप्स॑वश्चि॒त्रा यामे॑भिरीरते । वा॒श्रा अधि॒ ष्णुना॑ दि॒वः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 7 | Mantra No : 7

In Hindi:

ऋषि : पुनर्वत्सः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : उत् । ऊँ॒ इति॑ । त्ये । अ॒रु॒णऽप्स॑वः । चि॒त्राः । यामे॑भिः । ई॒र॒ते॒ । वा॒श्राः । अधि॑ । स्नुना॑ । दि॒वः ॥ ८.७.७

पदार्थ : (त्ये) वह पूर्वोक्त (अरुणप्सवः) अरुण वर्णवाले (चित्राः) आश्चर्यरूप (वाश्राः) शब्दायमान योद्धा लोग (यामेभिः) यानों द्वारा (दिवः, अधि) अन्तरिक्ष में (ष्णुना) ऊपर के भाग से (उदीरते, उ) चलते हैं ॥७॥

भावार्थ : इस मन्त्र में क्षात्रधर्मप्रधान योद्धाओं के रक्तवर्ण का वर्णन किया है कि वे देदीप्यमान सुन्दर वर्णवाले योद्धा लोग यानों द्वारा अन्तरिक्ष में विचरते हैं ॥७ ॥