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Rigveda / 8 / 7 / 11

मरु॑तो॒ यद्ध॑ वो दि॒वः सु॑म्ना॒यन्तो॒ हवा॑महे । आ तू न॒ उप॑ गन्तन ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 7 | Mantra No : 11

In Hindi:

ऋषि : पुनर्वत्सः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : मरु॑तः॑ । यत् । ह॒ । वः॒ । दि॒वः । सु॒म्न॒ऽयन्तः॑ । हवा॑महे । आ । तु । नः॒ । उप॑ । ग॒न्त॒न॒ ॥ ८.७.११

पदार्थ : (मरुतः) हे योद्धाओ ! (सुम्नायन्तः) सुख चाहनेवाले हम लोग (यत्, ह) जो (वः) आप लोगों को (दिवः) अन्तरिक्ष से (हवामहे) आह्वान करते हैं (आ, तु) अतः शीघ्र (नः) हमारे अभिमुख (उपगन्तन) आप आवें ॥११॥

भावार्थ : इस मन्त्र में उन योद्धाओं का आह्वान कथन किया है, जो विमान द्वारा अन्तरिक्ष में विचरते हैं, किसी अन्य देवविशेष का नहीं ॥११ ॥