Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 8 / 13 / 5

नू॒नं तदि॑न्द्र दद्धि नो॒ यत्त्वा॑ सु॒न्वन्त॒ ईम॑हे । र॒यिं न॑श्चि॒त्रमा भ॑रा स्व॒र्विद॑म् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 13 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : नारदः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृदुष्णिक् | स्वर : ऋषभः

विषय :

पदपाठ : नू॒नम् । तत् । इ॒न्द्र॒ । द॒द्धि॒ । नः॒ । यत् । त्वा॒ । सु॒न्वन्तः॑ । ईम॑हे । र॒यिम् । नः॒ । चि॒त्रम् । आ । भ॒र॒ । स्वः॒ऽविद॑म् ॥ ८.१३.५

पदार्थ : (इन्द्र) हे परमात्मन् ! (सुन्वन्तः) यज्ञ करते हुए हम (यत्, त्वा, ईमहे) जो आपसे याचना करते हैं, (तत्) वह (नः, नूनम्, दद्धि) हमें निश्चय दें और (नः) हमारे लिये (चित्रम्) विविध (स्वर्विदम्) सबको प्राप्त करानेवाले (रयिम्) धन को (आभर) आहरण करें ॥५॥

भावार्थ : हे सब धनों की राशि परमात्मन् ! हम लोग यज्ञ करते हुए जो आपसे याचना करते हैं, उन हमारी इष्ट कामनाओं को कृपा करके पूर्ण करें और हमको विविध प्रकार के धन देकर ऐश्वर्य्यसम्पन्न करें, ताकि हम यज्ञों के करने में सदा समर्थ हों ॥५ ॥