Rigveda / 8 / 14 / 14
मा॒याभि॑रु॒त्सिसृ॑प्सत॒ इन्द्र॒ द्यामा॒रुरु॑क्षतः । अव॒ दस्यूँ॑रधूनुथाः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 14 | Mantra No : 14
In English:
Seer : goShuuktyashvasuuktinau kaaNvaayanau | Devta : indra: | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : maayaabhirutsisRRipsata indra dyaamaarurukShataH . ava dasyuu.NradhuunuthaaH .
Component Words : maayaabhiH . ut.asisRRipsataH . indra . dyaam . aa.arurukShataH . ava . dasyuun . adhuunuthaaH . 8.14.14
In Hindi:
ऋषि : गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : मा॒याभिः॑ । उ॒त्ऽसिसृ॑प्सतः । इन्द्र॑ । द्याम् । आ॒ऽरुरु॑क्षतः । अव॑ । दस्यू॑न् । अ॒धू॒नु॒थाः॒ ॥ ८.१४.१४
पदार्थ : (इन्द्र) हे योद्धा ! आप (मायाभिः, उत्सिसृप्सतः) छल से उत्सर्पण करनेवाले (द्याम्, आरुरुक्षतः) अन्तरिक्ष में आरोहण की इच्छा करनेवाले (दस्यून्) स्तेनों को (अवाधूनुथाः) नीचे गिराकर भयभीत कर देते हैं ॥१४॥
भावार्थ : भाव यह है कि उपर्युक्त धनुर्विद्यावेत्ता राष्ट्रपति छल से युद्ध करनेवाले तथा व्योमयानादि द्वारा आकाश में युद्ध करनेवाले अन्यायी शत्रुओं को भी पराङ्मुख करके विजय को प्राप्त होता है, अतएव राष्ट्रपति के लिये धनुर्विद्या में कुशल होना परमावश्यक है ॥१४ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : मा॒याभिः॑ । उ॒त्ऽसिसृ॑प्सतः । इन्द्र॑ । द्याम् । आ॒ऽरुरु॑क्षतः । अव॑ । दस्यू॑न् । अ॒धू॒नु॒थाः॒ ॥ ८.१४.१४
भावार्थ :