Rigveda / 8 / 18 / 18
तु॒चे तना॑य॒ तत्सु नो॒ द्राघी॑य॒ आयु॑र्जी॒वसे॑ । आदि॑त्यासः सुमहसः कृ॒णोत॑न ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 18 | Mantra No : 18
In English:
Seer : irimbiThiH kaaNvaH | Devta : aadityaaH | Metre : uShNik | Tone : RRIShabhaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : tuche tanaaya tatsu no draaghiiya aayurjiivase . aadityaasaH sumahasaH kRRiNotana .
Component Words : tuche . tanaaya . tat . su . naH . draaghiiyaH . aayuH . jiivase . aadityaasaH . su.amahasaH . kRRiNotana . 8.18.18
In Hindi:
ऋषि : इरिम्बिठिः काण्वः | देवता : आदित्याः | छन्द : उष्णिक् | स्वर : ऋषभः
विषय :
पदपाठ : तु॒चे । तना॑य । तत् । सु । नः॒ । द्राघी॑यः । आयुः॑ । जी॒वसे॑ । आदि॑त्यासः । सु॒ऽम॒ह॒सः॒ । कृ॒णोत॑न ॥ ८.१८.१८
पदार्थ : (सुमहसः) हे सुन्दर तेजवाले (आदित्यासः) विद्वानों ! (नः) हमारे (तुचे) पुत्र के लिये (तनाय) तथा पौत्र के लिये (जीवसे) सुजीवननिमित्त (तत्) उस (द्राघीयः) अतिदीर्घ (स्वायुः) सुखमय आयु को (कृणोतन) करें ॥१८॥
भावार्थ : हे तेजस्वी विद्वान् पुरुषो ! आप हमारे पुत्र-पौत्रादि सन्तानों को भी ब्रह्मचर्य्यपूर्वक विद्याध्ययन करने का उपदेश करें, जिससे वे पवित्र जीवनवाले हों और सुखमय आयु व्यतीत करते हुए दीर्घजीवी हों, क्योंकि सदाचारसम्पन्न विद्वान् पुरुष ही सुखमय जीवन व्यतीत कर सकते हैं, मूर्ख नहीं ॥१८ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : इरिम्बिठिः काण्वः | देवता : आदित्याः | छन्द : उष्णिक् | स्वर : ऋषभः
पदपाठ : तु॒चे । तना॑य । तत् । सु । नः॒ । द्राघी॑यः । आयुः॑ । जी॒वसे॑ । आदि॑त्यासः । सु॒ऽम॒ह॒सः॒ । कृ॒णोत॑न ॥ ८.१८.१८
भावार्थ :