Rigveda / 8 / 20 / 8
गोभि॑र्वा॒णो अ॑ज्यते॒ सोभ॑रीणां॒ रथे॒ कोशे॑ हिर॒ण्यये॑ । गोब॑न्धवः सुजा॒तास॑ इ॒षे भु॒जे म॒हान्तो॑ न॒: स्पर॑से॒ नु ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 20 | Mantra No : 8
In English:
Seer : sobhariH kaaNvaH | Devta : marutaH | Metre : nichRRitpa~Nkti | Tone : pa~nchamaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : gobhirvaaNo ajyate sobhariiNaa.m rathe koshe hiraNyaye . gobandhavaH sujaataasa iShe bhuje mahaanto naH sparase nu .
Component Words : gobhiH . vaaNaH . ajyate . sobhariiNaam . rathe . koshe . hiraNyaye . go.abandhavaH . su.ajaataasaH . iShe . bhuje . mahaantaH . naH . sparase . nu . 8.20.8
In Hindi:
ऋषि : सोभरिः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
विषय :
पदपाठ : गोभिः॑ । वा॒णः । अ॒ज्य॒ते॒ । सोभ॑रीणाम् । रथे॑ । कोशे॑ । हि॒र॒ण्यये॑ । गोऽब॑न्धवः । सु॒ऽजा॒तासः॑ । इ॒षे । भु॒जे । म॒हान्तः॑ । नः॒ । स्पर॑से । नु ॥ ८.२०.८
पदार्थ : (सोभरीणाम्) सम्यग् भरण-पोषण करनेवाले उन योद्धाओं का (हिरण्यये) सुवर्णमय (कोशे) कौशेय वस्त्राच्छादित (रथे) रथ में (वाणः) शस्त्र (गोभिः) क्षेपण शब्दों से (अज्यते) प्रकाशित होता है (गोबन्धवः) विद्याओं के बन्धु (सुजातासः) सुन्दर सफल जन्मवाले (महान्तः) पूजनीय वह वीर (नः) हमारे (इषे) अन्न के लिये (भुजे) भोग के अर्थ (स्परसे) बल के अर्थ (नु) शीघ्र ही उपस्थित हों ॥८॥
भावार्थ : हे सब प्रजाओं का भरणपोषण करनेवाले तथा विद्याप्रिय योद्धाओ ! आप लोग शीघ्र ही हमारे विद्याप्रधान यज्ञों में सुशोभित होकर प्रजाजनों को अपनी रक्षा द्वारा सुख पहुँचावें अर्थात् हमको अपने उपदेशों से बलवान् बनावें और हमारे लिये पुष्कल अन्न-प्राप्ति के अर्थ यत्नवान् हों ॥८ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : सोभरिः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
पदपाठ : गोभिः॑ । वा॒णः । अ॒ज्य॒ते॒ । सोभ॑रीणाम् । रथे॑ । कोशे॑ । हि॒र॒ण्यये॑ । गोऽब॑न्धवः । सु॒ऽजा॒तासः॑ । इ॒षे । भु॒जे । म॒हान्तः॑ । नः॒ । स्पर॑से । नु ॥ ८.२०.८
भावार्थ :