Rigveda / 8 / 23 / 12
स त्वं न॑ ऊर्जां पते र॒यिं रा॑स्व सु॒वीर्य॑म् । प्राव॑ नस्तो॒के तन॑ये स॒मत्स्वा ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 23 | Mantra No : 12
In English:
Seer : vishvamanaa vaiyashvaH | Devta : agniH | Metre : paadanichRRiduShNik | Tone : RRIShabhaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : sa tva.m na uurjaa.m pate rayi.m raasva suviiryam . praava nastoke tanaye samatsvaa .
Component Words : saH . tvam . naH . uurjaam . pate . rayim . raasva . su.aviiryam . pra . ava . naH . toke . tanaye . samat.asu . aa . 8.23.12
In Hindi:
ऋषि : विश्वमना वैयश्वः | देवता : अग्निः | छन्द : पादनिचृदुष्णिक् | स्वर : ऋषभः
विषय :
पदपाठ : सः । त्वम् । नः॒ । ऊ॒र्जा॒म् । प॒ते॒ । र॒यिम् । रा॒स्व॒ । सु॒ऽवीर्य॑म् । प्र । अ॒व॒ । नः॒ । तो॒के । तन॑ये । स॒मत्ऽसु॑ । आ ॥ ८.२३.१२
पदार्थ : (ऊर्जाम्, पते) हे बलों के स्वामी अग्नि ! (सः, त्वम्) वह आप (नः) हमारे (सुवीर्यम्) सुन्दर पराक्रम से पूर्ण (रयिम्, रास्व) द्रव्य को दें और (नः) हमारे (तोके) पुत्रों में (तनये) पौत्रों में अथवा (समत्सु) संग्रामों में जो रक्षितव्य पदार्थ हैं, उनको (आ, प्राव) सब ओर से सुरक्षित रक्खें ॥१२॥
भावार्थ : इस मन्त्र का भाव यह है कि बलों के स्वामी योद्धाओं से सदैव प्रार्थना करनी चाहिये कि वह हमारी सन्तानों तथा ऐश्वर्य्य की रक्षा करें अर्थात् जो क्षात्रधर्मप्रधान क्षत्रियवर्ण है, वही ब्राह्मणादि अन्य वर्णों की रक्षा कर सकता है और अन्य वर्णों का काम केवल विद्या तथा धनादिकों का उपार्जन करना है, युद्ध करना नहीं ॥१२ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : विश्वमना वैयश्वः | देवता : अग्निः | छन्द : पादनिचृदुष्णिक् | स्वर : ऋषभः
पदपाठ : सः । त्वम् । नः॒ । ऊ॒र्जा॒म् । प॒ते॒ । र॒यिम् । रा॒स्व॒ । सु॒ऽवीर्य॑म् । प्र । अ॒व॒ । नः॒ । तो॒के । तन॑ये । स॒मत्ऽसु॑ । आ ॥ ८.२३.१२
भावार्थ :