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Rigveda / 8 / 45 / 17

उ॒त त्वाब॑धिरं व॒यं श्रुत्क॑र्णं॒ सन्त॑मू॒तये॑ । दू॒रादि॒ह ह॑वामहे ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 45 | Mantra No : 17

In Hindi:

ऋषि : त्रिशोकः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : उ॒त । त्वा॒ । अब॑धिरम् । व॒यम् । श्रुत्ऽक॑र्णम् । सन्त॑म् । ऊ॒तये॑ । दू॒रात् । इ॒ह । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.४५.१७

पदार्थ :

भावार्थ :