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Rigveda / 8 / 45 / 30

यः कृ॒न्तदिद्वि यो॒न्यं त्रि॒शोका॑य गि॒रिं पृ॒थुम् । गोभ्यो॑ गा॒तुं निरे॑तवे ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 45 | Mantra No : 30

In Hindi:

ऋषि : त्रिशोकः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : यः । कृ॒न्तत् । इत् । वि । यो॒न्यम् । त्रि॒ऽशोका॑य । गि॒रिम् । पृ॒थुम् । गोऽभ्यः॑ । गा॒तुम् । निःऽए॑तवे ॥ ८.४५.३०

पदार्थ :

भावार्थ :