Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 8 / 102 / 5

हु॒वे वात॑स्वनं क॒विं प॒र्जन्य॑क्रन्द्यं॒ सह॑: । अ॒ग्निं स॑मु॒द्रवा॑ससम् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 102 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : प्रयोगो भार्गव अग्निर्वा पावको बार्हस्पत्यः ; अथवाग्नी गृहपतियविष्ठौ सहसः सुतौ तयोर्वान्यतरः | देवता : अग्निः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रामाणिक भाष्य उपलब्ध होने पर अपलोड किया जायेगा।

पदपाठ : हु॒वे । वात॑ऽस्वनम् । क॒विम् । प॒र्जन्य॑ऽक्रन्द्यम् । सहः॑ । अ॒ग्निम् । स॒मु॒द्रऽवा॑ससम् ॥ ८.१०२.५

पदार्थ :

भावार्थ :