Rigveda / 9 / 7 / 7
स वा॒युमिन्द्र॑म॒श्विना॑ सा॒कं मदे॑न गच्छति । रणा॒ यो अ॑स्य॒ धर्म॑भिः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 7 | Mantra No : 7
In English:
Seer : asitaH kaashyapo devalo vaa | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : sa vaayumindramashvinaa saaka.m madena gachChati . raNaa yo asya dharmabhiH .
Component Words : saH . vaayum . indram . ashvinaa . saakam . madena . gachChati . raNa . yaH . asya . dharma.abhiH . 9.7.7
In Hindi:
ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : सः । वा॒युम् । इन्द्र॑म् । अ॒श्विना॑ । सा॒कम् । मदे॑न । ग॒च्छ॒ति॒ । रण॑ । यः । अ॒स्य॒ । धर्म॑ऽभिः ॥ ९.७.७
पदार्थ : (यः) जो पुरुष (अस्य धर्मभिः) इस परमात्मा के धर्मों को धारण करता हुआ (रणा) रमण करता है (सः) वह (वायुम्) ज्ञानी यज्ञकर्मा पुरुष के और (वायुम्) ऐश्वर्यवाले पुरुष के (अश्विना) ज्ञानयोगी और कर्मयोगी पुरुष के (साकम्) साथ (मदेन) अभिमान से (गच्छति) चल सकता है ॥७॥
भावार्थ : जो पुरुष परमात्मा के अपहतपाप्मादि धर्मों को धारण करता है, वह ज्ञानी विज्ञानी आदिकों की सब पदवियों को प्राप्त होता है अर्थात् अभिमान के साथ ज्ञानी विज्ञानी विद्वानों के मद को मर्दन कर सकता है ॥७॥
In Sanskrit:
ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : सः । वा॒युम् । इन्द्र॑म् । अ॒श्विना॑ । सा॒कम् । मदे॑न । ग॒च्छ॒ति॒ । रण॑ । यः । अ॒स्य॒ । धर्म॑ऽभिः ॥ ९.७.७
भावार्थ :