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Rigveda / 9 / 12 / 8

अ॒भि प्रि॒या दि॒वस्प॒दा सोमो॑ हिन्वा॒नो अ॑र्षति । विप्र॑स्य॒ धार॑या क॒विः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 12 | Mantra No : 8

In Hindi:

ऋषि : असितः काश्यपो देवलो वा | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : अ॒भि । प्रि॒या । दि॒वः । प॒दा । सोमः॑ । हि॒न्वा॒नः । अ॒र्ष॒ति॒ । विप्र॑स्य । धार॑या । क॒विः ॥ ९.१२.८

पदार्थ : (कविः) क्रान्तकर्मा (सोमः) सौम्यस्वभाववाला परमात्मा (दिवस्पदा) द्युलोक का व्यापकरूप से अधिकरण है (विप्रस्य) ज्ञान की (धारया) धारा से (प्रिया अभि अर्षति) हमको आनन्दित करता है ॥८॥

भावार्थ :